बरेली, 13.12.2025। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने पर चल रहे शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की श्रंख्ला में आज बरेली में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम सिख समाज के बीच था। जिसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता के रूप में थे। अर्बन हाट आडिटोरियम में हुए इस कार्यक्रम में सह सर कार्यवाह ने कहा कि गुरुतेग बहादुर जी भारतीय परंपरा के दैदीप्यमान नक्षत्र थे। उन्होंने समझाया कि गुरु महिमा और सिख समाज की परंपराओं को समझकर उनके रास्तों को अपना कर ही कुरीतिया, भेदभाव का समापन हो सकता है, राष्ट्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, कार्यक्रम अध्यक्ष व गुरू सिंह सभा गुरुद्वारा माडल टाउन के अध्यक्ष मलिक सिंह कालरा व विशिष्ट अतिथि व सेंट्रल गुरूपूरब कमेटी के अध्यक्ष परमजीत सिंह ओबराय ने मां भारती व गुरु तेग बहादुर जी के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन कर किया। अपने वकतव्य में सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि हमारे देश की एक परंपरा है, जो परंपरा है, वह अनूठी है, अद्भुत है। समय के अनुकूल परंपरायें बनती और बिगड़ती हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल, कार्यक्रम अध्यक्ष व गुरू सिंह सभा गुरुद्वारा माडल टाउन के अध्यक्ष मलिक सिंह कालरा व विशिष्ट अतिथि व सेंट्रल गुरूपूरब कमेटी के अध्यक्ष परमजीत सिंह ओबराय ने मां भारती व गुरु तेग बहादुर जी के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन कर किया। अपने वकतव्य में सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि हमारे देश की एक परंपरा है, जो परंपरा है, वह अनूठी है, अद्भुत है। समय के अनुकूल परंपरायें बनती और बिगड़ती हैं। जब कोई विकृति आती है तब कोई ना कोई दिव्य आत्मा अवतरित होती है और वह समाज के लिए दशा और दिशा तय करती है।
ईश्वर सबमें एक है। यही हमारी सनातन परंपरा का मूल मंत्र है। मनुष्य को मनुष्य से भेदभाव नहीं करना चाहिए। जब मुगल देश में आक्रांता के रूप में आये बाबर से लेकर औरंगजेब तक का समय बेहद बिषम था। धर्म पर, मंदिर पर, मठों पर और मानवता पर बड़े हमले हुए। उसी कालखंड में गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ जो संत परंपरा से आते थे। उस वक्त गुरु शिष्य परंपरा थी। वही शिष्य सिख बने।

सह सरकार्यवाह ने कहा कि गुरुनानक देव जी ने तमाम देशों में भ्रमण कर एक ही संदेश दिया कि ईश्वर एक है। भाषा सिर्फ प्रेम है। उन्होंने समस्त गुरुओं की महिमा का गुणगान किया तथा बताया कि सिख समाज ने अत्याचार के खिलाफ संघर्ष की सीख दी। खुद बलिदान दिया। खासकर उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी का उल्लेख किया। बोले – वह भारतीय परंपरा के दैदीप्यमान नक्षत्र थे। इनकी शहादत के 350 वर्ष हो गए। उन्हीं के बेटे थे गुरु गोविंद सिंह जी, जिन्होंने खालसा धर्म की स्थापना की, उनको पहचान दी। श्री गुरु तेग बहादुर जी का पूरा जीवन कुरीतियों से मुक्त करने और अत्याचार से संघर्ष का रहा। मुगलों के अत्याचार से आतंकित समाज को संघर्ष करने के लिए संदेश दिया। लोगों को एकत्र किया, जागृत किया। राष्ट्र के लिए एकजुट होकर लड़ने का बलिदान के लिए प्रेरित किया। इस्लाम कबूल नहीं किया, बलिदान दे दिया। उन्होंने कहा कि सिख समाज ने धर्म को मजबूत किया, एकजुट किया। हम सभी को कृतज्ञ होना चाहिए। समय की मांग है कि सामाजिक भेदभाव को समाप्त करके सभी एकजुट हों। सामाजिक भेदभाव हमारी बड़ी समस्या है। युवा हमारी संपदा हैं मगर नशा दूसरी बड़ी समस्या है। पंजाब में 33 लाख लोग शिकार हुए हैं। हम अपने नौजवानों को बचायें, सिख समाज और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मिलकर कार्य करे। लोगों का पलायन करना भी ठीक नहीं है, उनको जोड़ा जाये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सभी स्वयंसेवकों व समाज से आह्वाह्न है कि गुरुतेगबहादुर जी के जीवन के आदर्शों और मार्गदर्शन का स्मरण करें व अपने जीवन का निर्माण करें।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम अध्यक्ष मलिक सिंह कालरा ने संवाद के प्रयोग को सार्थक बताया तथा कहा कि 1984 के सिख दंगे के दोषियों को तत्काल सजा देनी चाहिए। सिख बंदी रिहा हों। उन्होंने सिख समाज से जुड़े अन्य कई विषय भी उठाये। विचार गोष्ठी में प्रांत प्रचारक धर्मेन्द्र कुमार, प्रांत संघ चालक शशांक भाटिया, क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य कृष्ण चन्द्र, विभाग प्रचार प्रमुख धर्मेन्द्र सचान आदि उपस्थित रहे। संचालन सरदार भूपेन्द्र सिंह ने किया।
धर्मेन्द्र सिंह जी की लेख
