
मोदी सरकार ने नए यूजीसी (#UGC) ड्राफ्ट नियमों की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय ले सकती है। यह निर्णय विश्वविद्यालयों, शिक्षक संगठनों, सामाजिक संगठनों और सवर्ण जातियों के संगठनों और कई राज्य सरकारों की ओर से व्यापक आपत्तियाँ सामने आने के बाद लिया गया है ।
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च स्तरीय कमिटी को यह ड्राफ्ट सौंपने का अर्थ है कि अब यह ड्राफ्ट ठंडे बस्ते में चला जाएगा। इसी के साथ सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी अपना पक्ष रखकर ड्राफ्ट के लागू किए जाने पर होने वाली समस्याओं के विषय में अपना पक्ष रखेगी। साथ ही अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन भी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के एंट्रिम ऑर्डर पर यह जो ड्राफ्ट नोटिफाई किया गया था उसे Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 नाम से जाना गया।
इस ड्राफ्ट के आने से देश के सवर्ण समाज मैं यह भय व्याप्त हो गया कि यूनिवर्सिटी और कालेजों में अनेक प्रकार के झूठे आरोप लगाकर उनके बच्चों को परेशान किया जा सकता है, उनका भविष्य बर्बाद किया जा सकता है, वे कभी भी किसी भी स्तर पर भारी भेदभाव के शिकार हो सकते हैं।
इसी कारण सवर्ण जातियों द्वारा इस बिल का भारी विरोध हो रहा था।
